राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। लाजी और बिरसा विकासखंड के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली देवरबेली से मालकुंआ सड़क भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हैं। करीब 8 वर्षों से लंबित यह सड़क अब बन भी रही है। जो कि हाथों से इसकी परतें उखड़ जाती है। जाहिर सी बात है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और गुणवत्ता से खुला समझौता किया गया है।

भ्रष्टाचार करने का जरिया बनी सड़क
जानकारी के अनुसार करीब 16 किलोमीटर लंबी इस सड़क का वर्क आर्डर फरवरी 2018 में ठेकेदार संजय अग्रवाल को जारी किया गया था। लेकिन लेटलतीफी मनमानी और घटिया कार्य के चलते ठेकेदार समय.सीमा में काम पूरा नहीं कर सका। विभाग द्वारा कई बार मौका दिए जाने के बावजूद जब कार्य अधूरा ही रहा तो मजबूरन विभाग को उसका टेंडर टर्मिनेट करना पड़ा। इसके बाद सड़क वर्षों तक अधर में लटकी रही और जनता धूल फांकती रही। बाद में रायसिंह कान्ट्रेक्ट को काम सौंपा गया। लेकिन उन्होंने भी कुछ दिनों तक कार्य कर उसे अधूरा छोड़ दिया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र का हवाला देकर काम बंद कर दिया। जबकि हकीकत यह है कि ठेकेदारों और विभाग की आपसी मिलीभगत ने इस सड़क को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया।
पुनः पुराने ठेकेदार को ठेका
उसी पुराने ठेकेदार को दोबारा काम दिया गया। वर्तमान में सड़क का वीटी डामर कार्य किया गया है। लेकिन वह भी पूरी तरह घटिया है। कई स्थानों पर डामर की मोटाई मानक से कम है। जिसके कारण सड़क जगह.जगह से बैठने लगी है और उखड़ रही है। यह साफ संकेत है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली सड़क में सामग्री की चोरी और तकनीकी मानकों की खुलेआम नजर अंदाज किया गया है। इस सड़क की कुल लागत करीब 10 करोड़ 28 लाख रुपये बताई जा रही है।
सैकड़ों गांव सड़क से वंचित
सड़क पूरी होने पर यह देवरबेली, सतौना, नरपी, मालकुआ, कोरका, बोंडारी, उर्सेकाल, अडोरी होते हुए पाथरी, बैहर और बिरसा को जोड़ेगी। जिससे दर्जनों गांवों को सीधा संपर्क जुडता और क्षेत्र के लोगांे को आवागमन में लाभ मिलना था। लेकिन घटिया निर्माण ने ग्रामीणों के सपनों पर पानी फेर दिया है। इतना ही नहीं इसी ठेकेदार द्वारा डाबरी.चैरिया.घोटी.लाजी सड़क का ठेका भी लिया गया था। जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। इसके कारण सैकड़ों गांव आज भी सड़क संपर्क से वंचित हैं।

हादसे को न्यौता देती सड़क
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क बनते ही उखड़ रही है तो विभागीय इंजीनियर,एसडीओ और अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं। क्या घटिया निर्माण पर जानबूझकर पर्दा डाला जा रहा है। या फिर भ्रष्टाचार की इस पूरी पटकथा में विभाग भी बराबर का भागीदार है। घटिया निर्माण को लेकर महाप्रबंधक तोवेंद्र जोहरे का कहना है कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच भी सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या फिर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह सड़क आने वाले समय में बड़े हादसों को न्योता दे सकती है। जरूरत है कि इस पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएए ताकि जनता के पैसों की लूट पर रोक लग सके।