नक्सल खात्मा के लिए 60 पुलिसकर्मियों को आउट आफ टर्न प्रमोशन - rashtrmat.com

नक्सल खात्मा के लिए 60 पुलिसकर्मियों को आउट आफ टर्न प्रमोशन

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश में 1990 से शुरू हुआ लाल आतंक 2025 की अंत में खत्म हो गया। यह सफलता हासिल करने वाली हाक फोर्स और बालाघाट पुलिस के जवानों के लिए डीजीपी कैलाश मकवाना ने वीरता की मिसाल पेश करने वाले 61 पुलिसकर्मियों को आउट आफ टर्न प्रमोशन देने का आदेश जारी किया है। ये वे जांबाज हैं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिबंधित माओवादी संगठन के जीआरबी डिवीजन के मलाजखंड दलम के चार खूंखार एरिया कमेटी सदस्यों को मुठभेड़ में मार गिराया था।


एक प्रमोशन लिफाफे में बंद
विशेष सशस्त्र बल और बालाघाट जिला पुलिस के कुल 61 जवानों को तत्काल पदोन्नत करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि प्रधान आरक्षक संत कुमार धुर्वे के खिलाफ एक अपराधिक प्रकरण दर्ज होने के कारण उनका प्रमोशन फिलहाल लिफाफा में बंद है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार ये सभी जवान विशेष सशस्त्र बल एसएएफ द्ध और बालाघाट जिला पुलिस बल से जुड़े हैं। इन कर्मियों को प्रतिबंधित माओवादी संगठन के जीआरबी डिवीजन के मलाजखंड दलम से जुड़े चार एरिया कमेटी सदस्यों को मुठभेड़ में मार गिराने की कार्रवाई के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। मारे गए नक्सलियों में रीता उर्फ तुब्बी श्रीरांगु हिडामी पति चंदू उर्फ देवचंद, सुमन, इमला उर्फ तुलसी और रवि मडावी उर्फ बदरे शामिल हैं।


38 पुलिसकर्मी शहीद हुए
एमपी के बालाघाट जिले में सन 1990 में थाना बिरसा में नक्सलियों के विरुद्ध पहली एफआईआर दर्ज की गई और फिर नक्सलियों की घटनाएं शुरू हुई। 1991 में थाना बहेला क्षेत्रान्तर्गत सीतापाला में ब्लास्ट कर 09 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और तभी से अब तक नक्सली विरोधी अभियान में 38 पुलिसकर्मी शहीद हो गए और लाल आतंक के कारण 57 आम नागरिक जनशहीद हुए। इस दौरान 45 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए और 28 हार्डकोर नक्सली गिरफ्तार किया गए। इस दौरान हॉक फोर्स सीआरपीएफ, कोबरा फोर्स, पुलिस जवान के 2200 से अधिक जवानों ने मोर्चा संभाला और 1 नवंबर से 11 दिसंबर तक 43 दिनों के भीतर 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। और 35 सालों का डच् को लगा नक्सली कलंक धुल गया।

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