राष्ट्रमत न्यूज,भोपाल(ब्यूरो के साथ रमेश कुमार‘रिपु’)। मध्यप्रदेश में 32 दिनों में 11 मासूमों की मौत के बाद सरकार ने माना कि सिरप कोल्ड्रिफ जहरीली है। उसे बैन लगाया। इसके पहले स्वास्थ्य मंत्री डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला सिरप कोल्ड्रिफ को सही बता रहे थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश के अस्पतालों में 76 किस्म की दवाएं अमानक है। जो मरीजों को दी जा रही हैं। मल्टी विटामिन से लेकर बुखार तक की दवाएं। डिलवरी में लगाए जाने वाले व्यूपी बेकेनिक रिस्थैटिक इंजेक्शन तक अमानक हैं। रीवा में पांच महिलाओं की पागल सी स्थिति हो गयी थी। याददाश्त चली गयी है। तो क्या मान लिया जाए कि मध्यप्रदेश की सरकार मौत के बाद ही दवाओं को बैन करेगी। छिंदवाड़ा के परसिया में 11 बच्चों की मौत के लिए कांग्रेस डिप्टी सीएम को दोषी मानती है।

सरकारी सिस्टम की लापरवाही
मासूकों की मौत के लिए डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला की जवाबदेही बनती है। इसलिए कि 29 सितम्बर को छिंदवाड़ा में जिस सिरप कोल्ड्रिफ को जहरीला मानकर बैन कर दिया गया था। उसके सैंपल की जांच रिपोर्ट 4 अक्टूबर को आयी। जबकि तमिलनाडु सरकार ने 24 घंटे के भीतर कफ सिरप की जांच कर ली और बता दिया कि इसमें 48 फीसदी जहर है। शनिवार रात जिले के परासिया थाना में डाॅ प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी कांचीपुरम, तमिलनाडु के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद छिंदवाड़ा के कोतवाली थाना क्षेत्र के राजपाल चैक से डाॅक्टर प्रवीण सोनी को देर रात स्पेशल पुलिस टीम ने गिरफ्तार किया।

डिप्टी CM दोषी-कांग्रेस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गिरफ्तारी से क्या 11 बच्चे जी जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा कि कायदे से डिप्टी सीएम को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए कि और जनता से स्वीकारना चाहिए कि कहीं न कहीं 11 मासूमों की मौत में उनका विभाग और वो स्वयं दोषी हैं।
किसके इशारे पर जांच लटका
हैरानी की बात है कि तमिलनाडु सरकार ने श्री सन फार्मास्युटिकल में होने वाले इसके प्रोडक्शन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। ये सबकुछ 24 घंटे में हुआ। इधर मध्य प्रदेश के सिस्टम का आलम ये रहा कि छिंदवाड़ा से जब संदिग्ध दवाओं के सैंपल भोपाल की लैब में भेजे गए तो कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रा डीएस सिरप की जांच की बजाय ड्रग अथारिटी दूसरी दवाओं के सैंपल जांचते रहे। आखिर किसके इशारे पर ऐसा किया गया। वो कौन मंत्री है जिसके फोन पर ऐसा किया गया इसका खुलासा सरकार को करना चाहिए।

बच्चे मरते रहे ड्रग कंट्रोलर यात्रा पर
यह सीधे-सीधे अव्यस्था है कि 2 सितम्बर को जब एक बच्चे मौत हो गयी। सवाल उठे तो उस वक्त डिप्टी कंट्रोलर शोभित कोष्टा सैपल की जांच की पहल क्यों नहीं की। जब बच्चे मरने लगे तब वो 1 अक्टूबर से तीर्थ यात्रा पर चले गए। जो मध्य प्रदेश की लाइसेंसिंग अथारिटी हैं। एमपी की लैब के एनालाइजर नवमी और दशहरे की छुट्टी मनाते रहे। जब तमिलनाडु सरकार की रिपोर्ट आई और एमपी सरकार की किरकिरी हुई। यदि समय पर सैंपल की जांच हो जाती तो मौत की संख्या रोकी जा सकती थी। किरकिरी होने के बाद 4 अक्टूबर को छुट्टी वाले दिन लैब में ड्रग कंट्रोलर और एनालाइजर दफ्तर में बैठे।
सरकार में बैठे लोग दोषी
मसूमों की मौत हो गयी और सरकार ढोल पीट रही है कि हमने दवा बैन कर दिया। हैरानी वाली बात है कि 2 सितंबर को 4 साल के शिवम राठौड़ की मौत हो गई। इसे सामान्य घटना मानकर डिप्टी सीएम ने नजरअंदाज क्यों कर दिया। जब 15 दिन के भीतर 6 बच्चों की किडनी फेल होने से मौत हुई, तब जाकर प्रशासन और प्रदेश का स्वास्थ्य मंत्री को एहसास हुआ कि छिंदवाड़ा के परासिया ब्लाक में कुछ गलत हो रहा है।

मृत्यु दाता डाॅक्टर प्रवीण सोनी
बहुत देर हो गयी
लगातार होने वाली मौत के बाद 20 सितंबर को परासिया सिविल अस्पताल में एक अलग वार्ड तो बना दिया गया। लेकिन बड़ी बड़ी बातें करने वाली सरकार अब भी नहीं मान रही है कि हमारी गलती की वजह से मौतें हुई।एक ही तरीके से मासूमों की मौत होने के बाद भी न स्वास्थ्य अमला जागा और न ही स्वास्थ्य मंत्री के कान में जूं रेंगी। 18 दिन बाद स्वास्थ्य मंत्री को याद आया कि कप सिरप जहरीली है।
किडनी डैमेज हुआ
परासिया के 4 बच्चों को जब किडनी खराब होने की वजह से नागपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वहां उनकी किडनी की बायोप्सी हुई। बायोप्सी रिपोर्ट ने साफ रूप से कहा कि कफ सिरप में मौजूद केमिकल की वजह से किडनी डैमेज हुई है। यह भी पाया गया कि सभी बच्चों को एक ही कफ सिरप कोल्ड्रिफ दिया गया था।

एक जिले में जहर बैन दूसरे में नहीं
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा ने कहा स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला बताएं कि 29 सितंबर को सिरप को जब छिंदवाड़ा में प्रतिबंधित किया गया तो दूसरे जिले में क्यों बेचा जा रहा था। क्या सिरफ पर प्रतिबंध सिर्फ छिवाड़ा के लिए ही लगाया गया था। या फिर प्रतिबंध आधा-अधूरा लगा कर किसे बचाने का या फिर लाभ पहुंचाने के लिए सरकार कर रही थी। छिंदवाड़ा में सिरप बैन हुआ लेकिन जबलपुर सुपर स्टाकिस्ट के यहां से प्रदेश के दूसरे हिस्सों में सप्लाई बेरोकटोक जारी रही। यानी एक जिले में जहर बैन था तो दूसरे जिलों में बांटा जा रहा था।जबलपुर के कटारिया फार्मा से ये दवा प्रदेश के बाकी जिलों में सप्लाई होती थी।जबलपुर के कटारिया फार्मा से ये दवा प्रदेश के बाकी जिलों में सप्लाई होती थी।
76 किस्म की अमानक दवाई
बहरहाल कफ सिरप कोल्ड्रिफ् और नेक्सट्रा डीएस ने मासूमों की जान ले ली और सरकार दहशरा मनाती रही।डिप्टीसीएम शस्त्र पूजा करते रहे। विकास का नगाड़ा बजाते रहे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश के अस्पतालों में 76 किस्म की अमानक दवाई मरीजों को दी जा रही है,वो कब प्रतिबंधित की जाएंगी। मसलन-पैरासिटामोल, ओआरएस, आँख में डालने का आइमेंट,विटामिन,कैल्सियम आदि।