दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत का किया विरोध - rashtrmat.com

दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत का किया विरोध

राष्ट्रमत न्यूज नई दिल्ली(ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों की जमानत याचिकाओं का दिल्ली पुलिस ने विरोध किया। उसने कहा कि इन लोगों कीा साजिश के तहत देशभर में हिंसा फैलाने की कोशिश हुई। जिसमें उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक जैसे राज्य भी शामिल थे। उमर खालिद और शरजील इमाम साजिशकर्ता थे जिन्होंने लोगों को भड़काने का काम किया। इनका मकसद सत्ता परिवर्तन था। इसलिए इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने  हलफनामे में दावा किया

दिल्ली पुलिस ने 2020 दंगों से जुड़े CAAमामले में उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट में कड़ा विरोध किया है। दिल्ली पुलिस ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि मौजूद साक्ष्य, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से जुड़ी चैट्स भी शामिल हैं, यह साबित करते हैं कि यह साजिश पूर्व नियोजित थी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के मकसद से रची गई थी।

दंगे भड़काने का मकसद

पुलिस ने दावा किया है कि दंगे भड़काने का मकसद शांति को भंग करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने की कोशिश की गई। दंगे ठीक उसी समय भड़काए गए थे, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर आए थे। पुलिस ने कहा कि यह साजिश नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को ‘मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नरसंहार’ के रूप में पेश करने और उसे वैश्विक मुद्दा बनाने के लिए रची गई थी। दिल्ली पुलिस के हलफनामे में कहा गया है कि ऐसा अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करने और सीएए के मुद्दे को भारत में मुस्लिम समुदाय के नरसंहार के रूप में चित्रित करके इसे एक वैश्विक मुद्दा बनाने के लिए किया गया था।

53 लोगों की मौत हुई

पुलिस ने यह बात 177 पन्नों के हलफनामे में कही है, जो सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दाखिल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, जांच में मिले गवाहों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी सबूत बताते हैं कि यह दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध को हथियार बनाकर योजनाबद्ध तरीके से कराए गए थे।दरअसल, दिल्ली में फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 23 से 26 फरवरी तक हिंसा भड़क गई थी। जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए थे। अकेले दिल्ली में 753 एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस ने बताया कि पूरे देश मे उपद्रव फैलान की कोशिश की गई थी।